skip to main |
skip to sidebar
कभी कभी अदिति जिंदगी में युही कोई अपना लगता है.
कभी कभी अदिति वो बिछार जाए तो एक सपना लगता है.
ऐसे में कोई कैसे अपने आंसू ओ को बहने से रोके?
और कैसे कोई सोचले एवेर्य्थिंग'स गोंना बी ओके?
कभी कभी तो लगे जिंदगी में रही ना खुशी और ना मज़ा.
कभी कभी तो लगे हर दिन मुश्किल और हर पल एक सज़ा.
ऐसे में कोई कैसे मुश्कुराए, कैसे हसदे खुश होके?
और कैसे कोई सोच दे एवेर्य्थिंग गोंना बे ओके?
सोच जरा जानेजा तुझको हम कितना चाहते है.
रोतें है हम भी अजगर तेरी आँखों में आंसू आते है.
गाने तो आता नहीं है मगर फिर भी हम गाते है.
के अदिति माना कभी-कभी सारे जहाँ में अँधेरा होता है;
लेकिन रात के बाद ही तो सबेरा होता है.
कभी कभी अदिति जिंदगी में युही कोई अपना लगता है.
कभी कभी अदिति वो बिछड़ जाए तो एक सपना लगता है.
हे अदिति हसदे हसदे हसदे हसदे हसदे, हसदे तू ज़रा.
नहीं तो बस थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा, थोड़ा मुश्कुरा.
तू खुश है तो लगे के जहाँ में छाई है खुशी.
सूरज निकले बादलों से और बाटें जिंदगी.
सून तो जरा मदहोश हवा तुझसे कहने लगी.
के अदिति वो जो बिछड़-ते है एक न एक दिन फिर मिल जाते है;
अदिति जाने तू या जाने ना फूल फिर खिल जाते है.
कभी कभी अदिति जिंदगी में युही कोई अपना लगता है.
कभी कभी अदिति वो बिछार जाए तो एक सपना लगता है.
( हे अदिति हसदे हसदे हसदे हसदे हसदे, हसदे तू ज़रा.
नहीं तो बस थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा, थोड़ा मुश्कुरा. )-५
0 comments:
Post a Comment